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आरती: भक्ति और पूजा का सुंदर अध्याय
आरती एक प्रमुख हिन्दू धार्मिक प्रथा है, जो विशेष रूप से दिव्य देवी और देवताओं के प्रति आदर और भक्ति का प्रतीक है। यह एक पूजा प्रथा है जिसमें दीपों की अद्वितीय सीरी को दिव्य भक्ति और आराधना के साथ प्रकट किया जाता है।
आरती का महत्व
आरती का अर्थ होता है “सवारी” या “आदर से पूजना”। यह प्रार्थना का एक विशेष प्रकार होता है, जिसमें भक्त दिव्य देवी या देवता की आराधना करते हैं और उनकी महिमा का गुणगान करते हैं। आरती का पाठ एक पूजा के आधार के रूप में किया जाता है, जो विशेष रूप से मंदिरों, गृहों, और पूजा स्थलों में किया जाता है।
आरती के प्रकार
हिन्दू धर्म में अनेक देवी-देवताओं के लिए विभिन्न प्रकार की आरतियाँ हैं, जैसे कि:
आरती श्री गणेश की: गणेश जी के आरती पाठ से उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है और नई शुरुआतों के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने में मदद करता है।
आरती मां दुर्गा की: मां दुर्गा के आरती पाठ से शक्ति, सुरक्षा, और संकटों से मुक्ति मिलती है।
आरती श्री लक्ष्मी की: श्री लक्ष्मी के आरती पाठ से धन, संपत्ति, और आर्थिक समृद्धि होती है।
आरती श्री कृष्णा की: श्री कृष्णा के आरती पाठ से भक्ति और प्रेम का महत्वपूर्ण भाग माना जाता है, और जीवन को खुशियों से भर देता है।
आरती के लाभ
आध्यात्मिक विकास: आरती का पाठ हमारे आध्यात्मिक विकास में मदद करता है और हमें भगवान के प्रति भक्ति और समर्पण की भावना रखते हैं।
मानसिक शांति: आरती का पाठ हमारे मन को शांति और सान्त्वना प्रदान करता है, और हम तंत्रों की परेशानियों से मुक्ति प्राप्त करते हैं।
संकटों का निवारण: आरती का पाठ संकटों को दूर करने और सुरक्षा की प्राप्ति में मदद करता है।
समापन
आरती हमारे हिन्दू धर्म में आदर और भक्ति की एक अद्वितीय प्रार्थना प्रथा है, जिसमें हम दिव्य देवी और देवताओं के प्रति आदर करते हैं और उनकी महिमा का गुणगान करते हैं। यदि आप भी आरती के महत्व को समझते हैं और इसे अपने जीवन में शामिल करना चाहते हैं, तो यह आपके आध्यात्मिक और भक्ति जीवन को सुखमय और प्रेरणादायक बना सकता है।
Khatu Shyam Ji Ki Aarti: श्री खाटू श्याम बाबा की आरती, ओम जय श्याम हरे, बाबा जय श्री श्याम हरे
Aarti Kunj Bihari Ki: Krishan ji ki Aarti गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
EkaDashi Mata Aarti:ॐ जय एकादशी, जय एकादशी,जय एकादशी माता।
Ambe tu hai Jagdambe Kali:अम्बे तू है जगदम्बे काली,जय दुर्गे खप्पर वाली,
Giriraj Ji Ki Aarti: ॐ जय जय जय गिरिराज,स्वामी जय जय जय गिरिराज।संकट में तुम राखौ,निज भक्तन की लाज॥
Guru Gorakhnath Ji Ki Aarti: जय गोरख देवाजय गोरख देवा।कर कृपा मम ऊपरनित्य करूं सेवा ॥
Maa Parvati Aarti: जय पार्वती माताजय पार्वती माता।ब्रह्म सनातन देवीशुभ फल की दाता॥
Narmada Mata ki Aarti: ॐ जय जगदानन्दी,मैया जय आनंद कन्दी। ब्रह्मा हरिहर शंकर रेवा
Parshuram ji ki Aarti: ॐ जय परशुधारी,स्वामी जय परशुधारी।सुर नर मुनिजन सेवत,श्रीपति अवतारी॥
Baglamukhi Mata ki Aarti: जय जय श्री बगलामुखी माता,आरति करहुँ तुम्हारी।
Banke Bihari ji ki Aarti: श्री बाँकेबिहारी तेरी आरती गाऊँ।कुन्जबिहारी तेरी आरती
Shri Balaji ki Aarti: ॐ जय हनुमत वीरास्वामी जय हनुमत वीरा।संकट मोचन
Shri Gopal ji ki Aarti: आरती जुगल किशोर की कीजै,राधे धन न्यौछावर कीजै
Shri Chitragupt ki Aarti: ॐ जय चित्रगुप्त हरे,स्वामी जय चित्रगुप्त हरे।
Brahma ji ki Aarti: पितु मातु सहायक स्वामी सखा,तुम ही एक नाथ हमारे हो।
Narasimha ji ki Aarti: ॐ जय नरसिंह हरे,प्रभु जय नरसिंह हरे।
Ganesh ji ki Aarti: जय गणेश, जय गणेश,जय गणेश देवा।
Dhanwantri Bhagwan ki Aarti: जय धन्वन्तरि देवा,जय धन्वन्तरि जी देवा।
Bhagwan Purushottam ki Aarti: जय पुरुषोत्तम देवा,स्वामी जय पुरुषोत्तम देवा।महिमा अमित तुम्हारी,सुर-मुनि करें सेवा॥
Narasimha ji ki Aarti: आरती कीजै नरसिंह कुँवर की।वेद विमल यश गाऊँ मेरे प्रभुजी॥
Bhairav Baba ki Aarti: सुनो जी भैरव लाड़िले,कर जोड़ कर विनती करूँ।
Shree Ram ji ki Aarti: श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन,हरण भवभय दारुणम्।
Hanuman ji ki Aarti: आरती कीजै हनुमान लला की।दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
Maa Kali ki Aarti: ‘मंगल’ की सेवा, सुन मेरी देवाहाथ जोड़, तेरे द्वार खड़े।
Radha ji ki Aarti: आरती श्री वृषभानुसुता की,मंजुल मूर्ति मोहन ममता की।
Swami Ramdev Aarti: ॐ जय श्री रामादेस्वामी जय श्री रामादे।पिता तुम्हारे
Lalita Mata ki Aarti: श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी।राजेश्वरी जय नमो नमः॥करुणामयी सकल अघ हारिणी।
Lakshmi Mata ki Aarti: ॐ जय लक्ष्मी माता,मैया जय लक्ष्मी माता।तुमको निशिदिन सेवत,हरि विष्णु विधाता॥
Vaishno Devi Mata ki Aarti: जय वैष्णवी माता,मैया जय वैष्णवी माता।हाथ जोड़ तेरे आगे,आरती मैं गाता॥
Shani Dev ki Aarti: जय जय श्री शनिदेवभक्तन हितकारी।सूरज के पुत्र प्रभुछाया महतारी॥
Vindhyavasini Mata ki Aarti: सुन मेरी देवी पर्वतवासिनि,तेरा पार न पाया।
Shiv ji ki Aarti: ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥
Sharda Mata ki Aarti: मैया शारदा तोरे दरबारआरती नित गाऊँ।
Shakambhiri Maa ki Aarti: हरि ॐ श्री शाकम्भर अम्बा जी कीआरती कीजो।
Govardhan Maharaj ki Aarti: श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज,तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ।
Satyanarayan ji ki Aarti: जय लक्ष्मीरमणा श्री जय लक्ष्मीरमणा।सत्यनारायण स्वामी जनपातक हरणा॥
Sheetla Mata ki Aarti: जय शीतला माता,मैया जय शीतला माता।आदि ज्योति महारानीसब फल की दाता॥
Santoshi Mata ki Aarti: जय सन्तोषी माता,मैया जय सन्तोषी माता।अपने सेवक जन को,सुख सम्पत्ति दाता॥
Saraswati Mata ki Aarti: जय सरस्वती माता,मैया जय सरस्वती माता।सदगुण वैभव शालिनी,त्रिभुवन विख्याता॥
Surya Dev ki Aarti: जय कश्यप-नन्दन,ॐ जय अदिति नन्दन।त्रिभुवन – तिमिर – निकन्दन,भक्त-हृदय-चन्दन॥
Ganga Maa ki Aarti: ॐ जय गंगे माता,मैया जय गंगे माता।जो नर तुमको ध्याता,मनवांछित फल पाता॥
Ahoi Mata ki Aarti : जय अहोई माता,जय अहोई माता।तुमको निसदिन ध्यावतहर विष्णु विधाता॥